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सवाल जवाब: जानें गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के लिठकौन सा है सबसे उतà¥à¤¤à¤® महीना
आपके नाम के पà¥à¤°à¤¥à¤® अकà¥à¤·à¤° में छिपा है आपका à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯
Q नाम के लोग रचनातà¥à¤®à¤• गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से ओतपà¥à¤°à¥‹à¤¤ होते हैं। लोग इनकी तरफ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ हो जाते हैं। ये अंतरà¥à¤®à¥à¤–ी होते हैं और अपने ही खà¥à¤¯à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में गà¥à¤® रहते हैं, पर अपने करà¥à¤® की तरफ पूरà¥à¤£à¤¤à¤ƒ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ और समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ होते हैं। इसीलिठये जलà¥à¤¦ ही कामयाबी के शिखर पर पहà¥à¤‚चते हैं। बहà¥à¤¤ पाने की उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आकांकà¥à¤·à¤¾ नहीं होती, पर तकदीर के धनी होते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जीवन में कई बार आकसà¥à¤®à¤¿à¤• लाठहोता है। साà¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ में इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सफलता नहीं मिलती। लोगों से इनका वैचारिक मेल-मिलाप आसानी से नहीं होता। ये छल-कपट से दूर और सतà¥à¤¯ के पकà¥à¤·à¤§à¤° होते हैं। ये बेहद वफादार होते हैं, फिर à¤à¥€ पà¥à¤°à¤£à¤¯ संबंध में असफल सिदà¥à¤§ होते हैं। इनका मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• बेहद पà¥à¤°à¤–र होता है। ये जिस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में जी जान से लग जाà¤à¤‚, सफल हो जाते हैं।पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨: गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के लिठउतà¥à¤¤à¤® महीना कौन सा है, उतà¥à¤¤à¤® संतति के लिठकà¥à¤¯à¤¾ सावधानी रखनी चाहिà¤? उतà¥à¤¤à¤°: शीतकाल में विशेष रूप से माघ और फालà¥à¤—à¥à¤¨ माह में धारण गरà¥à¤ उतà¥à¤¤à¤® संतान का बीजारोपण करते हैं। यानी जो बचà¥à¤šà¥‡ जो अकà¥à¤Ÿà¥‚बर से दिसंबर के मधà¥à¤¯ जनà¥à¤® लेते हैं, उनके जीवन में संघरà¥à¤· का परिमाण अनà¥à¤¯ लोगों से कम होता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सितंबर के मधà¥à¤¯ से लेकर जनवरी के मधà¥à¤¯ तक निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ होती है। गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ और गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ मां-पिता के विचारों का संतान पर पूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है। गरà¥à¤ धारण करने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ वादà¥à¤¯ संगीत, गायन, मंतà¥à¤° और गणित संतान को उतà¥à¤¤à¤® मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने के साथ संवेदनशील व मानवीय अचà¥à¤›à¥‡ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से लबरेज कर उतà¥à¤¤à¤® मनà¥à¤·à¥à¤¯ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में महती à¤à¥‚मिका का निरà¥à¤µà¤¹à¤¨ करते हैं। मां-पिता की सकारातà¥à¤®à¤• सोच व मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¹à¤Ÿ, जहां उतà¥à¤¤à¤® à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करती है, वहीं नकारातà¥à¤®à¤• और उलà¥à¤Ÿà¥€ सोच के साथ रोना-धोना, सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ की चिड़चिड़ाहट संघरà¥à¤· में इजाफा करती है। गरà¥à¤ के दौरान नितà¥à¤¯ विनोदपूरà¥à¤£ हलà¥à¤•े-फà¥à¤²à¥à¤•े कà¥à¤·à¤£ संतान के होठों पर हंसी रोपकर उसके संघरà¥à¤· को नà¥à¤¯à¥‚नतम बनाती है और महतà¥à¤µà¤¾à¤•ांकà¥à¤·à¥€ विचार उसे फलक पर बिठाते हैं।
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